साये में बीती वो खौफनाक रात - Bhoot Pret ki Kahaniya

आज हम आपको ऐसी एक भूत प्रेत की घटना से रूबरू करवा रहे हैं जिसे पढ़ने के बाद शायद अगली बार आप रात के अंधेरे में घर से बाहर निकलने से पहले कई बार सोचेंगे इतना ही नहीं अगर कोई आपको अपने ऊपर बीती इन काली शक्तियों के बारे में बताएगा तो आप हंसकर उसका मजाक नहीं उड़ाएंगे कृपया इन Bhoot Pret ki Kahaniya को मजाक में भी बच्चों और कमजोर दिल वाले लोगों को भूत कि कहानियां कतई न सुनाए |

साये में बीती वो खौफनाक रात - Bhoot Pret ki Kahaniya

आपको जादू टोना, काली शक्तियों से सामना या प्रेतों का घर पर कब्जा यह सब किसी फिल्म की कहानी जैसी लगती है जो सुनने में जितनी मजेदार लगती है यह किस्सा बहुत समय पहले का है 

हम नए घर में शिफ्ट होते ही मैं और मेरा परिवार कुछ अजीबो गरीब घटनाओं को महसूस करने लगें  किराए का मकान था इसीलिए आस पड़ोस वालों से ज्यादा मेल-जोल भी नहीं हो पाया था कुछ दिन तो सब ठीक चल रहा था लेकिन दिन बीतने के साथ ही वहां कुछ ऐसी घटनाएं होने लगीं जिसे समझ पाना हमारे लिए बहुत मुश्किल था

रात के समय वहां कुछ चलती फिरती परछाइयां तो नजर आती ही थीं साथ ही ऐसा भी महसूस होता था जैसे कुछ है जो हमें दिखाई नहीं दे रहा. घर का किराया कम था और जगह भी ठीक थी इसीलिए मेरे परिवार ने इन सब चीजों को नजरअंदाज करना शुरू कर दिया लेकिन एक दिन ऐसा हुआ जिसकी कल्पना मैंने या मेरे परिवार ने कभी सपने में भी नहीं की थी ऐसा कुछ जिसे चाह कर भी अनदेखा नहीं किया जा सकता था

पिताजी को किसी काम से घर से बाहर जाना पड़ा और रात को वह घर वापस नहीं लौट पाए जिसके परिणामस्वरूप मुझे और मां को अकेले ही घर में रात गुजारनी पड़ी रात को अचानक बगल वाले कमरे से कुछ अजीब अजीब सी आवाजें आने लगी |

वह कमरा हमारा नहीं था, मकान मालिक के ही कब्जे में था हमारे मकान मालिक ने उस कमरे में प्रवेश ना करने की चेतावनी भी दी थी इसीलिए कभी उस ओर जाने की सोची भी नहीं. लेकिन अब जब हमें उस कमरे में से किसी के चीखने और फिर अचानक रोने जैसी आवाजें आने लगी तो इन आवाजों से हमारी नींद टूट गई और हम डर के मारे सहम गए

पहले तो लगा जैसे बाहर किसी का झगड़ा हो रहा है लेकिन घड़ी में जब समय देखा तो रात के दो बज रहे थे मां और मुझे समझने में देर नहीं लगी कि यह आवाजें उसी कमरे में से आ रही हैं जहां हमारे जाने की मनाही थी. मकान मालिक का कहना था कि उस कमरे में उनका पुराना सामान पड़ा है इसीलिए हम भी वहां जाने में दिलचस्पी नहीं रखते थे

परंतु अब जब वह कमरा हमारे लिए एक पहेली बन गया तो उसे खोलना हमारे लिए जरूरी सा हो गया था. पहले तो सोचा कि सुबह उसे खोलेंगे लेकिन फिर उन आवाजों ने हमें एक रात भी ना रुकने दिया और हम उसे खोलने के लिए तैयार हो गए |

डर तो बहुत लग रहा था लेकिन यह भी पता था कि अगर अभी ना खोला गया तो इस कमरे की सच्चाई कभी बाहर नहीं आएगी. इसीलिए मैं और मां डरते-डरते उस कमरे की ओर बढ़ने लगे. हमें लगा था कि कमरा खोलने के लिए हमें मशक्कत करनी पड़ेगी लेकिन जैसे ही कमरे के दरवाजे पर हाथ लगाया वह आसानी से खुल गया

उस कमरे के अंदर का माहौल देखकर मैं और मां दोनों डर से कांपने लगे. इतना ही नहीं हम एक-दूसरे से कुछ कह भी नहीं पा रहे थे कमरा पूरी तरह से लाल रोशनी से घिरा हुआ था और अंदर अजीब सी गंध आ रही थी. हम अंदर की ओर बढ़ने लगे तो वहां पुरानी और टूटी-फूटी पेंटिंग्स पड़ी थीं. जो थीं तो किसी व्यक्ति की लेकिन किसकी यह हमें समझ नहीं आया |

कमरे के अंदर हमें एक औरत बैठी दिखाई दी जो हमारे मकान मालिक की बहन थी. एक कोने में बैठकर वो ना जाने किससे बात कर रही थी हमें उसके आसपास तो क्या पूरे कमरे में उसके अलावा कोई और नहीं दिखाई दिया. जैसे ही हम उसकी ओर बढ़े वह और तेज तेज रोने लगी. वह रोती तो अचानक से कोई उसे जोर से चुप करवाने के लिए डांटने लगता. कौन डांटता कहां से आती आवाजें हमें कुछ नहीं पता चला. बस ऐसा लगा कि कोई जोर का धक्का मारकर बाहर की ओर भागा है

वह कौन था और मकान मालिक की बहन वहां कैसे आई और क्यों आई यह सब सवाल आज भी एक सवाल ही है. मैं और मां दोनों ने उसी समय अपने रिश्तेदार को कॉल किया और वहां से चले जाने का निर्णय किया. अगले दिन पिता जी के घर पहुंचते ही हमने उन्हें सब कुछ बताया और कभी दोबारा वहां ना जाने का निर्णय किया |

पर आज भी एक सवाल मुझे हमेशा परेशान करता है कि आखिर वह सच था या सिर्फ हमारा भ्रम... अगर सच था तो क्या आज भी वो वही है |

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साये में बीती वो खौफनाक रात - Bhoot Pret ki Kahaniya साये में बीती वो खौफनाक रात - Bhoot Pret ki Kahaniya Reviewed by Jokes me on October 08, 2018 Rating: 5

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