एक मजदूरी ऐसी भी हिंदी कहानी

मासूम बच्चे की मजदूरी

Majduri Aur Majburi Ki Kahani
कुछ दिन पहले की ही बात है मैं पूजा करने बैठी ही थी की एक बच्चे की ज़ोर – ज़ोर से भीख मांगने की आव़ाज दरवाजे के बाहर से आने लगी वह बच्चा बिना रुकें चिल्लाये जा रहा था किसी तरह मैं पूजा से उठकर जब बाहर आई, तो देखा वह बच्चा मुश्किल से पांच – छह साल का था उसके बिना रुके यूँ चिल्लाने से मुझे बहुत गुस्सा आ रहा था मगर उसकी उम्र को देखकर मुझे दया भी आ रही थी | तभी मैंने उस बच्चे से पूछा झाड़ू लगाओगे! पहले तो वो मुझे शांत होकर टकाटक देखता रहा और फिर चिल्ला – चिल्लाकर “माई भीख दे दो” कहने लगा | जब वो कुछ पल के लिए शांत हुआ तो मैंने दुबारा उस बच्चे से कहा झाड़ू लगाओगे लेकिन उसने इसबार हाँ कह दिया हाँ माई लगाऊंगा | मैं उसे एक झाड़ू देकर और काम बताकर बापस घर के अंदर आ गयी | थोड़ी देर के बाद जब में बाहर आई तो देखा बच्चा अपने कटोरे में रखे चावल से खेल रहा है | मैंने उसके पास जाकर पूछा, तुमने आंगन साफ क्यूँ नहीं किया ? तो उसका जवाब था “भीख दे दो माई, माँ ने भीख मांगने को कहा है मेरे द्वारा माँ के बारे में पूछने पर उसने कहा माँ घर पर सो रही होगी |

मुझे आश्चर्य हुआ उस माँ पर जो अपने मासूम से बच्चे को भीख मांगने के लिए भेजकर खुद चैन की नींद सो रही थी | मैंने कहा अगर तुम यहाँ झाड़ू लगाओगे तभी मैं तुम्हें खाने को दूंगी, मगर भीख नहीं, तुम्हे तुम्हारी मजदूरी मिलेगी साथ ही दस रूपये और रोटी – आचार भी खाने को दूंगी | ये सुनकर बच्चा बहुत खुश हुआ और चहकते हुए बोला, “रोटी – आचार दोगी और पैसे भी” मैंने कहा हाँ बैठा दूंगी | उसने तुरंत झाड़ू उठाई और खुश होकर आंगन में झाड़ू लगाने लगा यधपि बच्चा बहुत छोटा था और उस बच्चे को सफाई अर्थ कहा पता था फिर भी वह बच्चा दाएं – बाएं हाथ चलाता गया मैं वही खड़े उस बच्चे को निहारने लगी वो बच्चा बार – बार पूछता में झाड़ू अच्छे से लगा रहा हूँ न ! और मैं उसके मासूम से चेहरे को देखकर हा में सर हिला देती | 

यधपि मरे दिल के एक कोने में यह बात खटक रही थी की मैं इस पांच साल के बच्चे से काम करवा रही हूँ मैं निष्ठुर होकर ऐसा करवा रही थी ताकि उस बच्चे के कोमल मन में काम करके फल पाने की भावना जागे उस मासूम बच्चे को भीख न देने के पीछे मेरी मंशा ये थी की उसके मन में सदेव मेहनत करने का वीज पनपे, तभी वो बच्चा अगले को समझाने की क्षमता रखेगा | मैंने उस बच्चे के मासूम हाथों में रोटी – आचार और दस रुपये रख दिए और कहा ये तुम्हारी मेहनत का फल है अब मेरे दरवाजे पर आओगे तो “भीख देदे मई” मत कहना | 

मुझे नहीं पता की उस बच्चे को मेरी बाद समझ आई या नहीं मगर वह दुसरे बच्चों को अपनी मेहनत की मजदूरी दिखाने लगा | यह देख मुझे बहुत ख़ुशी हुई मगर मेरे मन में माँ होने के नाते पीड़ा भी थी जिस बच्चे को बचपन की खुशिया चाहिए थी वो बच्चा अपने परिवार का पेट पालने के लिए कितने फटकारो और दुत्कारों की गलियों से होकर गुजर रहा था |
एक मजदूरी ऐसी भी हिंदी कहानी एक मजदूरी ऐसी भी हिंदी कहानी Reviewed by Admin on February 05, 2018 Rating: 5

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